Tuesday, 8 July 2014

गुस्सा आता है....

आज हमारी सरकार कॉर्पोरेट को सब्सिडी 5.3 लाख करोड़ देती है और ग़रीबो को दी जाने वाली सब्सिडी केवल 2.5 लाख करोड़ है|

लेकिन किसी को भी अच्छा नही लगता है कि ग़रीबो को क्यो कुछ दिया जा रहा है| वो भूखा मर जाए|

मानरेगा को बंद कर दो| फुड सब्सिडी बिल को न लाओ| ग़रीबो को ये क्यो दिया जाता है ?

सब कोई चाहता है की सब कुछ मुझे ही दे दे| मेरी सहनभूति है ऐसे मन्द्बुधि वाले लोगो के साथ|

कोई ना साहब ग़रीब तो मरने के लिए ही पैदा होता है|

याद करो............

ए रिक्शा वाले साले देख के चला साले हरामी कहाँ कहाँ से आ जाते है?

सत्येंद्र पटेल

Friday, 20 June 2014

थोड़ी सी.............

जो ग़लत है ,ग़लत ही कहूँगा,
विरोधी हूँ,विरोधी ही रहूँगा,
अकेला हूँ, अकेला ही रहूँगा,
चलता हूँ, चलता ही रहूँगा,
जो ताक़त तुममे है लगाते रहना,
आजमाता हूँ, आजमाता ही रहूँगा|

सत्येन्द्र पटेल

Monday, 9 June 2014

हमने भी देखा है

हमने भी देखा है,
पाँव मे पड़ी मोटी-मोटी बेवाई,
कमजोर कंधा और पतली कलाई,
पेट और पीठ की बनती इकाई,
हमने तो देखा है और आपने?
हमने तो देखा है,
क्योकि मैं मजदूर हूँ और मजबूर भी||
साहब हमे भूल जाओ
विकास ही विकास गाओ,
बुलेट ही बुलेट चलाओ,
शहर ही शहर बसाओ,
आप हमे रौदते चलो,
क्योकि मैं मजदूर हूँ||
बुलाना मुझे जब आपको हो ज़रूरत,
आपके सड़को का करूँगा मरम्मत,
आपके बुलेट ट्रेन को रखूँगा सलामत,
आपके लिए उठा लूँगा सारा जहमत,
बच्चो को भी करूँगा सहमत,
कि साहब की सेवा करते रहे,
क्योकि साहब आप ही भगवान हो||
बदले मे आप देना मुझे गाली,
दोनो गालो पर जोरदार ताली,
छोड़ देना मेरे बच्चो का पेट खाली,
क्यो न मिले मुझे यह पुरस्कार,
मैं तो इक अदना सा मजदूर हूँ सरकार,
साहब आपका जीवन मंगलमय हो,
साहब की जय हो, जय हो||
सत्येंद्र पटेल

Monday, 2 June 2014

हमारा समाज.....



अब क्या कहे? सब के सब सब जब साधुवाद का झंडा बुलंद किए हुए है तो ऐसी परिस्थिति मे आप कुछ नही कर सकते|  मेरा समाज ढोंगी हो गया है, यहा के लोग ढोंग करने मे माहिर होते जा रहे है या उन्हे किसी भी तरह से इस तरफ धकेला जा रहा है|

अभी कुछ दिन पहले लोग इस बात पर खुश हो रहे थे कि लोगो ने जाति से उपर उठ कर लोगो ने मतदान किया| लोगो ने अपने अपने तरीक़ो से इसे ब्यख्या किया| कुछ लोगो ने तो यहाँ तक कहा कि जियोग्राफ़िक चैनल वाले ढूँढ रहे है कि हाथी ने अंडा दिया है| ये सब क्या है? मैं तो इसे दीमाक का दिवालियापन ही कहूँगा या फिर लोगो को अपने समाज के वास्तविक परिस्थिति के बारे मे ज्ञान नही है और सारे लोग कूप मंडूक है|
आज भी दलितो और महिलाओ के साथ वैसा ही वार्ताव किया जा रहा है जैसा अंग्रजो के जमाने मे हो रहा था| शत मे से एक कोई महिला या दलित उपर उठ जाना ही हमारे समाज के अंदुरूनी खामियो को नही मिटा सकता है| लोग सड़क पर चलते हुए महिलाओ पर ना जाने कैसे कैसे बाते करते है| ये सब बाते ज़्यादा पढ़े लिखे लोग ही करते है, मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ| आज भी दलितो को आप अपने घर मे आने नही देते तो कौन सा विकास और किसके लिए विकास| ऐसा विकास आपको ही मुबारक|
लोग मूह फाड़ फाड़ कर बलात्कार जैसी घटनाओ की निंदा करते है, लेकिन अपने अंदर झाँककर नही देखते है| सारे लोग महिलाओ का रोज किसी न किसी रूप मे उनका बलात्कार करते है, चाहे वो फब्तिया कसकर या किसी और रूप मे| बलात्कार जैसी कोई भी घटना को रोकना किसी भी सरकार के बस की बात नही है, जब तक की आप और हम सजग न रहे और सबको बराबर का हक़ दे|

ये सब सारी परेशानी कब दूर होगी?

और अब क्या कहे आप तो अपने आप को होशियार समझते ही है| समझ लीजिए और और आइए सपनो की दुनिया मे चलते है जहाँ नदियाँ जोड़ी जा रही हो, हम और आप बुलेट ट्रेन मे चाय पी कर गप्पे मार रहे है| वाह आप क्या कह रहे है , हम दुनिया के सबसे ताकतवर देश बन गये है| वाह वाह.........

Wednesday, 28 May 2014

सम्मान सहित??

सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए............

अब आ गया है ढोंगी चूरन....... इसे खाए और

अब पढ़ने की ज़रूरत नही है|बिना पढ़े ही आपकी स्मृति बहुत तेज हो सकती है| उसके बाद आप नाचने लगेंगे| फिर आपको मानव के विकास मे लगा दिया जाएगा|

अरे छोटुआ बारे पास हो गैइले की नाई,
चल तोहू के मंत्री बना दे तनी|||

अबकी बार...... भौक ना यार

चलो ये भी सही!!!!

क्या बात है हर चीज़ का अपना मतलब होता है जो भविष्य मे जाकर पता चलता है|
1- स्मृति ईरानी का मानव विकास मंत्रालय मिलना संजय निरूपम का वो बेहूदा बयान भी है जो गुजरात के रिज़ल्ट के बाद ABP न्यूज़ पर दिया था|
2- मीडिया ने 2002 2002 चिल्लाते चिल्लाते ही मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया|

ये इतने बड़े घटना का मात्र इक कतरा भर है| बहुत सारे और कतरे है, लेकिन इसके प्रभाव से कोई इनकार नही कर सकता है|


सत्येंद्र पटेल

Thursday, 15 May 2014

चुनाव 2014

1-इस चुनाव मे मिडिया ने भारतीय जनता पार्टी के साथ स्पष्ट रूप से भाग लिया| इसीलिए परिणाम आने से पहले ही लोगो ने कैबिनेट मंत्री का नाम सुझाने या बताने लगे| ऐसा कही होता है क्या????
2- यह चुनाव सबसे महँगा चुनाव था| इसमे पार्टियो ने खरीद-फ़रोख़्त का धंधा खोल रखा था| इसमे छोटी पार्टियो को नुकसान होता है|
3-निर्वाचन आयोग के साख पर धब्बा लगा है क्योकि नेता अपने आप को मॉडेल कोड ऑफ कंडक्ट से उपर रक्खा| किसी पर कोई करवाई भी न होना एक कारण है|
4- सबसे ज़्यादा मॉडर्न टेक के साथ यह चुनाव लड़ा गया|
5- यह एक योग्य नेता के अनुपलब्धता का दौर था क्योकि नरेंद्र मोदी के सामने राहुल की कोई औकात नही और छोटी पार्टियो के नेता के पास पैसा नही होता है| लोगो ने मजबूरी मे या ज्ञान की कमी से नरेंद्र मोदी को चुना| यहाँ उत्साह का तत्व भी हो सकता है|
6-मारपीट का दौर था| बड़े-बड़े नेता पर लोगो ने हमला करवाया जैसे की क़ानून का कोई राज ही ना हो|

सत्येंद्र पटेल