Monday, 2 June 2014
हमारा समाज.....
अब क्या कहे? सब के सब सब जब साधुवाद का झंडा बुलंद किए हुए है तो ऐसी परिस्थिति मे आप कुछ नही कर सकते| मेरा समाज ढोंगी हो गया है, यहा के लोग ढोंग करने मे माहिर होते जा रहे है या उन्हे किसी भी तरह से इस तरफ धकेला जा रहा है|
अभी कुछ दिन पहले लोग इस बात पर खुश हो रहे थे कि लोगो ने जाति से उपर उठ कर लोगो ने मतदान किया| लोगो ने अपने अपने तरीक़ो से इसे ब्यख्या किया| कुछ लोगो ने तो यहाँ तक कहा कि जियोग्राफ़िक चैनल वाले ढूँढ रहे है कि हाथी ने अंडा दिया है| ये सब क्या है? मैं तो इसे दीमाक का दिवालियापन ही कहूँगा या फिर लोगो को अपने समाज के वास्तविक परिस्थिति के बारे मे ज्ञान नही है और सारे लोग कूप मंडूक है|
आज भी दलितो और महिलाओ के साथ वैसा ही वार्ताव किया जा रहा है जैसा अंग्रजो के जमाने मे हो रहा था| शत मे से एक कोई महिला या दलित उपर उठ जाना ही हमारे समाज के अंदुरूनी खामियो को नही मिटा सकता है| लोग सड़क पर चलते हुए महिलाओ पर ना जाने कैसे कैसे बाते करते है| ये सब बाते ज़्यादा पढ़े लिखे लोग ही करते है, मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ| आज भी दलितो को आप अपने घर मे आने नही देते तो कौन सा विकास और किसके लिए विकास| ऐसा विकास आपको ही मुबारक|
लोग मूह फाड़ फाड़ कर बलात्कार जैसी घटनाओ की निंदा करते है, लेकिन अपने अंदर झाँककर नही देखते है| सारे लोग महिलाओ का रोज किसी न किसी रूप मे उनका बलात्कार करते है, चाहे वो फब्तिया कसकर या किसी और रूप मे| बलात्कार जैसी कोई भी घटना को रोकना किसी भी सरकार के बस की बात नही है, जब तक की आप और हम सजग न रहे और सबको बराबर का हक़ दे|
ये सब सारी परेशानी कब दूर होगी?
और अब क्या कहे आप तो अपने आप को होशियार समझते ही है| समझ लीजिए और और आइए सपनो की दुनिया मे चलते है जहाँ नदियाँ जोड़ी जा रही हो, हम और आप बुलेट ट्रेन मे चाय पी कर गप्पे मार रहे है| वाह आप क्या कह रहे है , हम दुनिया के सबसे ताकतवर देश बन गये है| वाह वाह.........
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