Monday, 9 June 2014

हमने भी देखा है

हमने भी देखा है,
पाँव मे पड़ी मोटी-मोटी बेवाई,
कमजोर कंधा और पतली कलाई,
पेट और पीठ की बनती इकाई,
हमने तो देखा है और आपने?
हमने तो देखा है,
क्योकि मैं मजदूर हूँ और मजबूर भी||
साहब हमे भूल जाओ
विकास ही विकास गाओ,
बुलेट ही बुलेट चलाओ,
शहर ही शहर बसाओ,
आप हमे रौदते चलो,
क्योकि मैं मजदूर हूँ||
बुलाना मुझे जब आपको हो ज़रूरत,
आपके सड़को का करूँगा मरम्मत,
आपके बुलेट ट्रेन को रखूँगा सलामत,
आपके लिए उठा लूँगा सारा जहमत,
बच्चो को भी करूँगा सहमत,
कि साहब की सेवा करते रहे,
क्योकि साहब आप ही भगवान हो||
बदले मे आप देना मुझे गाली,
दोनो गालो पर जोरदार ताली,
छोड़ देना मेरे बच्चो का पेट खाली,
क्यो न मिले मुझे यह पुरस्कार,
मैं तो इक अदना सा मजदूर हूँ सरकार,
साहब आपका जीवन मंगलमय हो,
साहब की जय हो, जय हो||
सत्येंद्र पटेल

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