Friday, 20 June 2014

थोड़ी सी.............

जो ग़लत है ,ग़लत ही कहूँगा,
विरोधी हूँ,विरोधी ही रहूँगा,
अकेला हूँ, अकेला ही रहूँगा,
चलता हूँ, चलता ही रहूँगा,
जो ताक़त तुममे है लगाते रहना,
आजमाता हूँ, आजमाता ही रहूँगा|

सत्येन्द्र पटेल

Monday, 9 June 2014

हमने भी देखा है

हमने भी देखा है,
पाँव मे पड़ी मोटी-मोटी बेवाई,
कमजोर कंधा और पतली कलाई,
पेट और पीठ की बनती इकाई,
हमने तो देखा है और आपने?
हमने तो देखा है,
क्योकि मैं मजदूर हूँ और मजबूर भी||
साहब हमे भूल जाओ
विकास ही विकास गाओ,
बुलेट ही बुलेट चलाओ,
शहर ही शहर बसाओ,
आप हमे रौदते चलो,
क्योकि मैं मजदूर हूँ||
बुलाना मुझे जब आपको हो ज़रूरत,
आपके सड़को का करूँगा मरम्मत,
आपके बुलेट ट्रेन को रखूँगा सलामत,
आपके लिए उठा लूँगा सारा जहमत,
बच्चो को भी करूँगा सहमत,
कि साहब की सेवा करते रहे,
क्योकि साहब आप ही भगवान हो||
बदले मे आप देना मुझे गाली,
दोनो गालो पर जोरदार ताली,
छोड़ देना मेरे बच्चो का पेट खाली,
क्यो न मिले मुझे यह पुरस्कार,
मैं तो इक अदना सा मजदूर हूँ सरकार,
साहब आपका जीवन मंगलमय हो,
साहब की जय हो, जय हो||
सत्येंद्र पटेल

Monday, 2 June 2014

हमारा समाज.....



अब क्या कहे? सब के सब सब जब साधुवाद का झंडा बुलंद किए हुए है तो ऐसी परिस्थिति मे आप कुछ नही कर सकते|  मेरा समाज ढोंगी हो गया है, यहा के लोग ढोंग करने मे माहिर होते जा रहे है या उन्हे किसी भी तरह से इस तरफ धकेला जा रहा है|

अभी कुछ दिन पहले लोग इस बात पर खुश हो रहे थे कि लोगो ने जाति से उपर उठ कर लोगो ने मतदान किया| लोगो ने अपने अपने तरीक़ो से इसे ब्यख्या किया| कुछ लोगो ने तो यहाँ तक कहा कि जियोग्राफ़िक चैनल वाले ढूँढ रहे है कि हाथी ने अंडा दिया है| ये सब क्या है? मैं तो इसे दीमाक का दिवालियापन ही कहूँगा या फिर लोगो को अपने समाज के वास्तविक परिस्थिति के बारे मे ज्ञान नही है और सारे लोग कूप मंडूक है|
आज भी दलितो और महिलाओ के साथ वैसा ही वार्ताव किया जा रहा है जैसा अंग्रजो के जमाने मे हो रहा था| शत मे से एक कोई महिला या दलित उपर उठ जाना ही हमारे समाज के अंदुरूनी खामियो को नही मिटा सकता है| लोग सड़क पर चलते हुए महिलाओ पर ना जाने कैसे कैसे बाते करते है| ये सब बाते ज़्यादा पढ़े लिखे लोग ही करते है, मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ| आज भी दलितो को आप अपने घर मे आने नही देते तो कौन सा विकास और किसके लिए विकास| ऐसा विकास आपको ही मुबारक|
लोग मूह फाड़ फाड़ कर बलात्कार जैसी घटनाओ की निंदा करते है, लेकिन अपने अंदर झाँककर नही देखते है| सारे लोग महिलाओ का रोज किसी न किसी रूप मे उनका बलात्कार करते है, चाहे वो फब्तिया कसकर या किसी और रूप मे| बलात्कार जैसी कोई भी घटना को रोकना किसी भी सरकार के बस की बात नही है, जब तक की आप और हम सजग न रहे और सबको बराबर का हक़ दे|

ये सब सारी परेशानी कब दूर होगी?

और अब क्या कहे आप तो अपने आप को होशियार समझते ही है| समझ लीजिए और और आइए सपनो की दुनिया मे चलते है जहाँ नदियाँ जोड़ी जा रही हो, हम और आप बुलेट ट्रेन मे चाय पी कर गप्पे मार रहे है| वाह आप क्या कह रहे है , हम दुनिया के सबसे ताकतवर देश बन गये है| वाह वाह.........