Wednesday, 28 May 2014

सम्मान सहित??

सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए............

अब आ गया है ढोंगी चूरन....... इसे खाए और

अब पढ़ने की ज़रूरत नही है|बिना पढ़े ही आपकी स्मृति बहुत तेज हो सकती है| उसके बाद आप नाचने लगेंगे| फिर आपको मानव के विकास मे लगा दिया जाएगा|

अरे छोटुआ बारे पास हो गैइले की नाई,
चल तोहू के मंत्री बना दे तनी|||

अबकी बार...... भौक ना यार

चलो ये भी सही!!!!

क्या बात है हर चीज़ का अपना मतलब होता है जो भविष्य मे जाकर पता चलता है|
1- स्मृति ईरानी का मानव विकास मंत्रालय मिलना संजय निरूपम का वो बेहूदा बयान भी है जो गुजरात के रिज़ल्ट के बाद ABP न्यूज़ पर दिया था|
2- मीडिया ने 2002 2002 चिल्लाते चिल्लाते ही मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया|

ये इतने बड़े घटना का मात्र इक कतरा भर है| बहुत सारे और कतरे है, लेकिन इसके प्रभाव से कोई इनकार नही कर सकता है|


सत्येंद्र पटेल

Thursday, 15 May 2014

चुनाव 2014

1-इस चुनाव मे मिडिया ने भारतीय जनता पार्टी के साथ स्पष्ट रूप से भाग लिया| इसीलिए परिणाम आने से पहले ही लोगो ने कैबिनेट मंत्री का नाम सुझाने या बताने लगे| ऐसा कही होता है क्या????
2- यह चुनाव सबसे महँगा चुनाव था| इसमे पार्टियो ने खरीद-फ़रोख़्त का धंधा खोल रखा था| इसमे छोटी पार्टियो को नुकसान होता है|
3-निर्वाचन आयोग के साख पर धब्बा लगा है क्योकि नेता अपने आप को मॉडेल कोड ऑफ कंडक्ट से उपर रक्खा| किसी पर कोई करवाई भी न होना एक कारण है|
4- सबसे ज़्यादा मॉडर्न टेक के साथ यह चुनाव लड़ा गया|
5- यह एक योग्य नेता के अनुपलब्धता का दौर था क्योकि नरेंद्र मोदी के सामने राहुल की कोई औकात नही और छोटी पार्टियो के नेता के पास पैसा नही होता है| लोगो ने मजबूरी मे या ज्ञान की कमी से नरेंद्र मोदी को चुना| यहाँ उत्साह का तत्व भी हो सकता है|
6-मारपीट का दौर था| बड़े-बड़े नेता पर लोगो ने हमला करवाया जैसे की क़ानून का कोई राज ही ना हो|

सत्येंद्र पटेल

ग़रीबी नही ग़रीबो को मिटाओ |



कृपया आप न आप बनकर न पाठ करे... अपने आप को एक ग़रीब मजदूर के साँचे मे फिट करके देखिए.......

आज की हमारी राजनीति केवल सांकेतिक मूल्‍यो पर ही आधारित है| कभी कोई आटो वालो के सम्मेलन मे जाता है तो कोई किसी दलित के यहाँ खाना ख़ाता है,तो कोई मुस्लिमो के ब्यापार मंडल मे जाकर लंबी चौड़ी बाते फेकता है| ये सब बाते हमे क्या बताती है, ये हमे बताती है कि हमारे देश मे कितनी जागरूकता , शिक्षा की कमी है| मैं मानता हूँ कि हमे आज़ादी के अभी ६७ साल ही हुए है लेकिन ज़रा सोचिए क़ि अंग्रजो के शासन और आज की हमारे व्यवस्था मे क्या फ़र्क है? आप पाएँगे की कुछ तथाकथित उदाहरण को छोड़कर लगभग सारी व्यवस्था पुरानी जैसी ही है|कौन कहता है कि हम गुलाम थे,अगर हम तब गुलाम थे तो आज भी हम गुलाम ही हैं| अब आप पूछेंगे कैसे? मैं बताता हूँ............
१- उस समय हम पुलिस वालो से डरते थे,आज क्या हमे पुलिस वालो से डर नही लगता है? लगता है , मैने कोई बुरा काम नही किया है लेकिन डर लगता है , पता नही क्यो लगता है कि अगर पकड़ लेगा तो मारेगा भी और मेरे सारे पैसे छीन लेगा| ये सारी परिस्थितिया पहले भी थी| लोग कहते है कि पहले तो पुलिस किसी को भी तंग करती थी, नही पुलिस केवल उन्हे ही तंग करती थी जो की विद्रोही थे. उन्हे तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था.. वो व्यवस्था आज भी है , भले ही प्रताड़ना का हथियार क्यो न बदल गया हो..........
२-किसी भी अफ़सर से मिलना और अपनी बाते कहना एक बहुत बड़ी बात थी जो कि आज भी है| आज तो और भी मुश्किल है क्यो कि आज तो हाथ पैर जोड़ना पड़ता है फिर भी काम नही होता है| पहले ऐसा नही था रोने गिड़गिदाने से बड़ा से बड़ा काम बहुत ही आसानी से हो जाता था| आज तो वो हथियार भी ग़रीबो से छीन लिया गया|

सत्येंद्र पटेल

Sunday, 4 May 2014

धर्मांतरण


मैं एक हिंदू परिवार मे पैदा हुआ लेकिन मैं एक हिंदू नही मरूँगा |
                                                             बाबा भीमराव रामजी अंबेडकर

धर्मांतरण को मैं बहुत ही अच्छा मानता हूँ, आप मेरे से असहमत हो सकते है, आपका पूरा अधिकार है| जो कारण मुझे लगता है वो मैं आपको बताता हूँ| मैं एक हिंदू हूँ तो मैं अपने समाज के बुराइयो के बारे मे प्रकाश मे डाल सकता हूँ|

मेरे देश मे धर्म का परिवर्तन वही लोग करते है जो ग़रीब है या फिर समाज के उन सभी बुराइयो को महसूस करते रहे हो| यह एक अच्छी बात है लोग धर्म परिवर्तन करके इन सभी परेशानियो का हल कुछ हद तक निकाल लेते है|हम पहले अपने परिवार की देखभाल के लिए पैदा हुए है न की धर्म की रक्षा के लिए| यह मुझे बिल्कुल मान्य नही है कि मेरा परिवार भूखा मर जाय और मैं धर्म धर्म करता रहूं| मैं एक बार नही हज़ार बार धर्म परिवर्तन करूँगा, किसी धर्म के प्रति बिशेष प्यार के लिए नही, अपने अस्तित्व को बचाने के लिए| जो लोग इसके खिलाफ आंदोलन चलाते है क्या उन लोगो को उनकी ब्यथा समझ मे नही आती है, आती है लेकिन वो भी एक दुकान चलाते है| कौन चाहता है कि हम अपना धर्म छोड़ कर एक नई दुनिया मे जाए,कोई नही चाहता है|

हमने अपने धर्म की रक्षा के जिन लोगो को अपना गुरु मान रखे है वो सब पाखंड करते है| कोई मस्जिद तोड़ने मे लगा हुआ है, कोई चाहता कि मैं मठ का मालिक बन कर राज करूँ, कोई भी सेवा नही करना चाहता है| सब के सब चोर है| कोई सेक्स के रैकेट मे पकड़ा जाता है, यहाँ हालत ऐसी है मुझे तो सारे केसरिया रंग वाले सारे के सारे चोर लगने लगे है| लगभग सारे केसरिया रंग वाले इस समय ज़मीन के दलाल बन चुके है| कोई भी साधु बचा ही नही है सब के सब शैतान बन चुके है| अगर आप उन्हे कुछ कह दो तो सब आपको जान से मार देंगे| तब काहे की साधुपना रे भाई..

जहाँ देखो वही गेरुआ रंग पहन करके चुनाव मे खड़े हो जाते है, पूछो क्यो,तो कहेंगे कि जनता की भलाई के लिए| अरे भाई ये भलाई वाला काम बहुत लोग कर सकते है, जिसके लिए तुमने यह केसरिया पहना हुआ है वो काम करो न| लेकिन वो काम ये कर ही नही सकते क्योकि उसके लिए थोड़ी ही केसरिया पहना है| ये बाबा केसरिया के आड़ मे सब कुछ करते है कोई अपना धंधा स्वदेसी के नाम पर खोल रखा है, और थोड़ा सा लोगो ने प्यार दिया, और आकर आपके सर पर बैठ जाएँगे कि आप उन्हे वोट दो, अरे भाई तुम्हे यही सब करना था तो पैंट शर्ट पहनो न| करो न तुम्हे किसने रोका है| लेकिन जो हिंदू समाज के किसी भी समस्या पर इनका ध्यान नही पड़ता है, क्यो की वहाँ पर मीडिया, पैसा नही है| भारत मे मंदिरो और मठ को तो लूट लेना चाहिए या देश के तिजोरी मे डाल देना चाहिए| ये सारे भिखारी धर्म के नाम पर पैसा इकट्ठा करते है लेकिन हमारे धर्म के बचाव के लिए कुछ नही करते है| ग़रीबो को अच्छी शिक्षा दो, इलाज दो तो कोई क्यो अपना धर्म छोड़ कर कही और जाएगा|

हमारे देश मे सारे धर्मो के प्रचार प्रसार का क़ानूनी हक मिला हुआ है| मेरे विलेज मे अच्छे हॉस्पिटल और शिक्षा तो केवल ईसाई ही देते है| कितनो को नई जिंदगी दी है| वो कहाँ से पैसा लाते है, कोई विदेशी सरकार देती है, नही वो अपने यहाँ के चर्च मे दान किए हुए पैसो का सही इस्तेमाल करते है| आपके यहा क्या हो रहा है? सोचिए????

लोग गंगा और गाय को बचाने के नाम पर सियासत कर रहे है| ये दोनो बाते इतनी ढोंगी लगती है कि जब भी कोई गाय और गंगा की बात करता है तो जी करता है मै उसके मुँह पर एक जोरदार तमाचा मारू| जब गाय इतनी प्यारी है तो उसको पालो, अपने घर पर लाकर उसकी सेवा करो| गंगा को बर्बाद किसने किया है तुमने और मैने तो किया है, तो पहले उसे बर्बाद करना तो बंद करो तभी तो बचाओगे |इतने मे ही तो फट जाती है| सब के सब पाखंडी है|


सत्येंद्र पटेल

मित्रो अबकी बार

मित्रो,नदियो को जोड़ा जाने वाला है,अब आप नौकायान करेंगे मित्रो,हम आपके घर तक गंगा को लाएँगे और आपको नौका मे उठाकर बैठाने के लिए सेना की मदद भी लेंगे|मित्रो आपको जानकर् आपको खुशी होगी कि यही काम हम पिछले पंद्रह वर्षो से करते आ रहे है|

मित्रो, हम बुलेट ट्रेन चलाएँगे जो की आपको चंद्रमा पर तीन घंटो मे पहुँचाएगी| चंद्रमा पर आपको दो दिन और तीन रात बिताने की मुफ़्त सेवा सुरू की जाएगी| सोचो मित्रो सोचो...........

मित्रो अब किसी को किसान बनने की ज़रूरत नही है हम सबको इंजिनियर और डॉक्टर बनाएँगे और सारा समान लैब और फैक्टरी मे तैयार होगा मित्रो और आपको इसी बुलेट ट्रेन से डिलीवेरी दी जाएगी|

मित्रो हम आपकी बात सीधे पाकिस्तान,चीन और अमेरिका से कराने के लिए संकल्पित है| आप कश्मीर के साथ साथ लाहौर भी माँग लेना, हम उधर नौकायान पर चलेंगे|

हम आपको वाइ फ़ाई से बिजली देंगे मित्रो आपके मोबाइल, कंप्यूटर को बिना तार के बिजली पहुचाएँगे| आप जाए जहाँ, बिजली पहुचे वहाँ...........

मित्रो हमने रोबोट जापान से आयात कर लिया है आपका सारा कम वही कर दिया करेगा| उसके बाद हम और आप बैठकर 3D मे बाते करेंगे|

मित्रो सोच रहा हूँ कि कुछ दिनो के बाद देश का कमान अंबानी जैसे लोगो को दे देगे इससे दो फ़ायदे है कि उपर वाले सारे काम भी हो जाएगा और हम और आप चाय पर बैठकर दिनभर चर्चा करेंगे|

लेकिन उससे पहले आपसे दो चीज़ माँगता हूँ| १- लोहा २. वोट

अबकी बार ............ सरकार| हर हर.............. हर हर...................... हर हर............................

हमारे नेता ही दोषी क्यो? हम क्यो नही!



हर आदमी एक आसान रास्ता हमेसा से चुनता आ रहा है| हमने उन्हे मौका दिया है उन्हे आसान रास्ता चुनने का और हमे बाटने का | आज हमारा समाज का लगभग केवल एक चौथाई हिस्सा ही राजनीति की ऐसे तथाकथित ईमांदारी से समझदार है (कुछ सिंगल मतदाता के अलावा) | वही लोग बाकी लोगो को उसकाते है या दिसानिर्देश देते है| यही लोग राजनीति को अपनी रखैल बना कर रखे हुए है| इन्ही लोगो के कंधे पर बंदूख रख कर आज के ह्मारे नेता अपना निसाना लगाते है | इन्हे चुनाव के समय मे कुछ दीनो के लिए टाइम पास करने का साधन मिल जाता है और साथ मे उतने दिन का खर्चा और उतने ही दिन की इज़्ज़त | ह्मारे देश के जो पठ्ये लिखे जो युवा है उनके ज़िम्मे है की ओ बताए की कौन कैसा है | आज की वर्तमान इस्थिति ऐसी है की आज का हर आदमी भविष्यवक्ता बना बैठा हुआ है लोग सोचते है की वो आएगा तो ये दूर हो जाएगा , उसके आने से हमसे फ्ला समाज के लोग डरने लगेगे| लेकिन लोग इतिहास उठाकर देख ले की कभी भी और कही भी आज के आधुनिक समाज मे उसी को दिक्कत उठानी पड़ी है जो की कोई अल्पसंक्यक हो| रही बात डरने और डराने की ज़रा सोचो की कही तुम्हे अपने परिवार के किसी सदस्य को खोना पॅड जाए तो क्या होगा| मेरा अपना मानना है कि आज का सबसे बड़ा मुद्दा है भ्रष्टाचार| अगर यह एक बीमारी हमारे समाज से दूर हो जाए तो क्या कहना| भ्रष्टाचार केवल सरकार ही नही दूर कर सकती है इससे समाज को भी लड़ना होगा|

लोग जीडीपी दिखा दिखा कर कहते है की मैने विकास किया है लेकिन मुझे तो नही लगता है की अपने देश का कोई स्टेट लंडन हो गया है | मेरा मानना है कि हर एक प्रदेश की समस्या अलग-अलग होती है| कोई किसी भी प्रदेश की तुलना पंजाब से क्यो नही करता है जिसने कई दसको तक आतंकवाद को सहा है उसने जो भी विकास किया है अपने भौगोलिक बनावट और पंजाब के लोगो के मेहनत से| मेरा मानना है कि कुछ इसी तरह का विकास और भी प्रदेशो मे भी हुआ है| जो सम्रिध स्टेट है उनके पास टैक्श भी बहुत आता है| चोरी के बाद भी जो कुछ लगा वही सम्रिध राज्यो मे दिख रहा है| लेकिन ध्यान रखे की चोरी के बाद , अगर भ्रष्टाचार नही होता तो आप खुद सोच सकते है क्या ? ज़रा सोचिए की विकास हमारे देश मे क्यो नही हो रहा है....................................सोचिए......................................................................
शायद भ्रष्टाचार , तो सोचिए की इससे कैसे लड़ा जा सकता है और वोट दीजिए और सरकार का सहयोग कीजिए| जाती धर्म से उपर उठिए केवल अगले कुछ तीस सालो के लिए, तो हो सकता है कि हमारा आने वाला कल ठीक हो | नही तो जैसे आप जीवन जी रहे है वैसे ही आपका बेटा भी रहेगा तो आपका फ्यूचर आपके हाथ मे| आपके एक वोट की कीमत लाखो रुपये की है (इंडिया के वित्त बजेट से)| याद रखिए आपके इस एक वोट का ख़ामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ता है|

और हाँ हर समस्या का हल हथियार उठना ही नही होता कि जो भी तुम्हारे खिलाफ बोले तो तुम उसका गला काट दो | पुराने कड़वे यादो को भूलिए आगे की ओर देखने मे ही भलाई है| किसी भी व्यक्ति विशेष की निजी जीवन से प्रभावित होकर अपने वोट को निर्धारित न करे|
वर्तमान की घटनाक्रम को को देख कर एक ईमानदार आदमी को चुने| आज आम आदमी पार्टी के आ जाने से आपका वो पुराना जुमला ख़तम हो गया की साहब किसको दे सब तो वैसे ही है एक जैसे | अब आप इन लोगो मे से बेहतरीन को चुनिए|
आज तक हम सारे लोग राजनीति को दूर से बैठ कर गालिया देते थे लेकिन जब आज कोई (अरविंद केजरीवाल) उसे सॉफ करने के लिए अपना सारा कुछ त्याग कर आया है तो उसका सम्मान करिए न की ये कहिए कि ये भी ऐसे ही हो जाएँगे| हो जाएँगे तो देखा जाएगा पर आज ज्योत्सी न बने| लोग कहते क़ि वो जो कहता है प्रॅक्टिकल नही है, लेकिन वो जो बाते कहता है वो तो आज ही नही आज़ादी के बाद के इन्ही ६७ ईयर मे हो जाने चाहिए था| अगर आप आज भी प्रॅक्टिकल नही मानते तो भगवान आपका भला करे| आपका विस्वास किसी और दल मे हो सकता है लेकिन मुझे नही लगता की आप उसके विजन को नही मानते होंगे| अगर आप की सोच अब भी नही बदली तो शायद भगवान ने आपको गाली देने के लिए ही बनाया होगा तो फिर आपका धनयवाद |

अंतिम बात आज पोलिटिकल पार्टी और कॉर्पोरेट के मिलीभगत से अपना देश चल रहा है तो इस कड़ी को कमजोर करने की ज़रूरत है|


देश के लिए आपका
सत्येंद्र पटेल

विकसित भारत ???????


लगता है मेरा सपना एक ऐसे विकसित देश मे रहने का धरा का धरा रह जाएगा जहाँ कोई भी आदमी भूखा न हो, और उसके पास ब्यक्तिगत जीवन के सारे साजो- समान उपलब्ध हो | मुझे उसी तरह की निराशा हो रही है जैसे की कलाम साहब को हो रही होगी | लेकिन हो भी क्यो न यहाँ के लोग जो बदलने के लए तैयार नही है| जब भी मेरी बात मेरे घनिष्ठ मित्रो से होती है है तब मुझे लगता है जब मेरे साथ के लोग ही नही बदलना चाहते है तो मैं औरो की क्या बात करू , मेरे कुछ साथी कहते है कि मुझे आने वाले दीनो में जब भी मुझे मौका मिलेगा तो तुरंत मैं भ्रष्टाचार करके तुरंत मैं अपने जीवन को अच्छा और अपने आप को साहब बना लूँगा | लोग अपने अतीत को बहुत जल्दी भूल जाते है इसलिए मैं तो अपने इसी वर्तमान को ही मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिन मानकर अपने जीवन को जीना चाहता हूँ| कोई भी अच्छा समाज वहॉ के एजुकेटेड लोगो के समझदारी पर निर्भर करता है,लेकिन भारत मे आज के लोग अपने परिवार के अलावा और किसी भी सामाजिक ज़िम्मेदारी से भाग जाना चाहते है, ये भी हो सकता है की वो लायक न हो| इतने बड़े देश को आगे बढ़ाने के लिए इच्छासकति की ज़रूरत होती है जो आज का अपना समाज पूरी तरह से खो चुका है|

अगर आप लोग ईमानदार रहेंगे तो हो सकता है कि इस देश का भला हो जाए यदि नही तो कोई बात नही, भगवान इस देश के ग़रीबो की रक्षा करे|

मैने सुना है कि इस देश मे पैसे से ही पैसा बनता है न की आपके अपने दिमाक के दम पर, यही इस देश की सबसे बड़ी परेशानी है| आप यहा पर अपना उद्योग नही चला सकते क्यो? क्योकि यहाँ पर हर आदमी इस भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से ग्रस्त हो चुका है,इससे हमे निकलना होगा| आप दूसरे को मत देखिए प्लीज़ आप अपने आप से ही शुरूवात तो कीजिए|

हम बदलेंगे देश बदलेंगा|

हमारे यहा के कुटीर उद्योग बिल्कुल बंद हो चुके है जो चल भी रहे है वो इन मल्टी नॅशनल कंपनी के आगे टिक नही पा रही है| सोचिए कि हर इक विलेज मे दो या तीन कुटीर उद्योग हो तो फिर क्या कहना | हमारे माताए , बहने , दादा ,दादी दिन भर वहाँ काम करके अपने घर का पूरा खर्चा वहाँ कर लेते| इसीलिए मुझे पुराने जमाने क़ी अर्थव्यवस्था बहुत ही जमती है|आज सरकार की नीतियो ने तो ग़रीबो को बेसहारा बना दिया है वो केवल अपनी हड्डी गलाते है वो भी केवल अपना और बच्चो के पेट भरने के लिए| वही कोई सरकारी कर्मचारी दिन मे केवल दो घंटे के कुर्सी तोड़ने के लिए उसे इतना पैसा की वो कुल्लू-मनाली आसानी से घूम सके | वाह रे देश तेरा क्या कहना !!!!!!

अब आप शारीरिक और मानसिक श्रम वाला जुमला मत फेकना, मुझे ठीक तरह से मालूम है कि कौन कितना मानसिक श्रम करता है|

ईमानदार बने रहे ............ धन्यवाद

सत्येंद्र पटेल

देश मे कितनी लूट मची है इसको समझो.......



हमारे संसाधानो की लूट कितनी मची है इसको आप समझते हो कि नही? सोचो कैसे ये हमारे राजनेता और कॉर्पोरेट हाउस मिलकर हमारे ही संसाधानो पर राजा बनकर बैठे हुए है|
१- हमारे देश की प्रति ब्यक्ति आय 15000 रुपये है|लेकिन हमारे देश की 80 से 85 प्रतिशत जनता इसके नीचे जीवन यापन करती है| इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि देश के कुछ घरानो के पास ही सारे अधिकार सुरक्षित है| सोचिए की केंद्र सरकार कहती है कि जो ३२ रुपये कमाता है वो ग़रीब नही है और गुजरात सरकार का कहना है की १२ रुपये कमाने वाला ग़रीब नही है| कितने शर्म की बात है कि हमारे देश मे ऐसे ग़रीब लोग भी है| लेकिन हमारे देश मे तो तथाकथित अमीर वही है न जो ३२ रुपये से उपर कमाता है| तो सोचिए देश का क्या हाल हो रहा है?
२- 32*30=960, मतलब जो ग़रीबी के सीमा पर खड़ा है, जो कभी भी अमीर हो सकता है(33 रुपये से ज़्यादा कमाकर) उसके और प्रति व्यक्ति आय मे कितना अंतर है................ 15000 - 960 = 14040 बाप रे बाप....
३- आपको कोयला,गैस और अन्य प्राकृतिक संपदा अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव (मुद्रा की दर को भी ध्यान मे रखे) से मिलता है क्यो? इन सब चीज़ो के मालिक तो हम है| लेकिन नही ये सत्ता के दलालो ने अपनी जमीर बेच दी है| लेकिन उससे बड़ी बात है कि हम नपुंसक हो गये है,नही तो इनकी इतनी मज़ाल कि वो हमारा घर लूट ले जाए| ये इतने अमीर कैसे हो जाते है? ये हमारा समान निकालकर हम तक पहुचाते है बस उसी का हमसे अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य लेते है| सोचो ये तो सरासर लूट है| ये तो वही बात हो गयी कि मैने अपना खेत किसी किसान को जोतने के लिए दिया, उसने मेरे ही खेत मे फसल उगाया और बाद मे कहता है कि अब तुम्हे भी बाजार मूल्य पर खरीदना पड़ेगा|
४- पिछली बार केवल 27 से 29 करोड़ लोगो ने ही अपने मत का प्रयोग किया था जबकि हमारे देश मे 70 करोड़ मतदाता है| अब आप कहते हो कि संसद मे मार- काट चल रहा है और सारे राजनेता चोर है| इस देश का कुछ नही हो सकता | mai भी मानता हूँ कि बिल्कुल नही हो सकता क्योकि आप कमजोर है| प्लीज़ अपने मत का प्रयोग ज़रूर करे|

सत्येंद्र पटेल