Sunday, 4 May 2014

धर्मांतरण


मैं एक हिंदू परिवार मे पैदा हुआ लेकिन मैं एक हिंदू नही मरूँगा |
                                                             बाबा भीमराव रामजी अंबेडकर

धर्मांतरण को मैं बहुत ही अच्छा मानता हूँ, आप मेरे से असहमत हो सकते है, आपका पूरा अधिकार है| जो कारण मुझे लगता है वो मैं आपको बताता हूँ| मैं एक हिंदू हूँ तो मैं अपने समाज के बुराइयो के बारे मे प्रकाश मे डाल सकता हूँ|

मेरे देश मे धर्म का परिवर्तन वही लोग करते है जो ग़रीब है या फिर समाज के उन सभी बुराइयो को महसूस करते रहे हो| यह एक अच्छी बात है लोग धर्म परिवर्तन करके इन सभी परेशानियो का हल कुछ हद तक निकाल लेते है|हम पहले अपने परिवार की देखभाल के लिए पैदा हुए है न की धर्म की रक्षा के लिए| यह मुझे बिल्कुल मान्य नही है कि मेरा परिवार भूखा मर जाय और मैं धर्म धर्म करता रहूं| मैं एक बार नही हज़ार बार धर्म परिवर्तन करूँगा, किसी धर्म के प्रति बिशेष प्यार के लिए नही, अपने अस्तित्व को बचाने के लिए| जो लोग इसके खिलाफ आंदोलन चलाते है क्या उन लोगो को उनकी ब्यथा समझ मे नही आती है, आती है लेकिन वो भी एक दुकान चलाते है| कौन चाहता है कि हम अपना धर्म छोड़ कर एक नई दुनिया मे जाए,कोई नही चाहता है|

हमने अपने धर्म की रक्षा के जिन लोगो को अपना गुरु मान रखे है वो सब पाखंड करते है| कोई मस्जिद तोड़ने मे लगा हुआ है, कोई चाहता कि मैं मठ का मालिक बन कर राज करूँ, कोई भी सेवा नही करना चाहता है| सब के सब चोर है| कोई सेक्स के रैकेट मे पकड़ा जाता है, यहाँ हालत ऐसी है मुझे तो सारे केसरिया रंग वाले सारे के सारे चोर लगने लगे है| लगभग सारे केसरिया रंग वाले इस समय ज़मीन के दलाल बन चुके है| कोई भी साधु बचा ही नही है सब के सब शैतान बन चुके है| अगर आप उन्हे कुछ कह दो तो सब आपको जान से मार देंगे| तब काहे की साधुपना रे भाई..

जहाँ देखो वही गेरुआ रंग पहन करके चुनाव मे खड़े हो जाते है, पूछो क्यो,तो कहेंगे कि जनता की भलाई के लिए| अरे भाई ये भलाई वाला काम बहुत लोग कर सकते है, जिसके लिए तुमने यह केसरिया पहना हुआ है वो काम करो न| लेकिन वो काम ये कर ही नही सकते क्योकि उसके लिए थोड़ी ही केसरिया पहना है| ये बाबा केसरिया के आड़ मे सब कुछ करते है कोई अपना धंधा स्वदेसी के नाम पर खोल रखा है, और थोड़ा सा लोगो ने प्यार दिया, और आकर आपके सर पर बैठ जाएँगे कि आप उन्हे वोट दो, अरे भाई तुम्हे यही सब करना था तो पैंट शर्ट पहनो न| करो न तुम्हे किसने रोका है| लेकिन जो हिंदू समाज के किसी भी समस्या पर इनका ध्यान नही पड़ता है, क्यो की वहाँ पर मीडिया, पैसा नही है| भारत मे मंदिरो और मठ को तो लूट लेना चाहिए या देश के तिजोरी मे डाल देना चाहिए| ये सारे भिखारी धर्म के नाम पर पैसा इकट्ठा करते है लेकिन हमारे धर्म के बचाव के लिए कुछ नही करते है| ग़रीबो को अच्छी शिक्षा दो, इलाज दो तो कोई क्यो अपना धर्म छोड़ कर कही और जाएगा|

हमारे देश मे सारे धर्मो के प्रचार प्रसार का क़ानूनी हक मिला हुआ है| मेरे विलेज मे अच्छे हॉस्पिटल और शिक्षा तो केवल ईसाई ही देते है| कितनो को नई जिंदगी दी है| वो कहाँ से पैसा लाते है, कोई विदेशी सरकार देती है, नही वो अपने यहाँ के चर्च मे दान किए हुए पैसो का सही इस्तेमाल करते है| आपके यहा क्या हो रहा है? सोचिए????

लोग गंगा और गाय को बचाने के नाम पर सियासत कर रहे है| ये दोनो बाते इतनी ढोंगी लगती है कि जब भी कोई गाय और गंगा की बात करता है तो जी करता है मै उसके मुँह पर एक जोरदार तमाचा मारू| जब गाय इतनी प्यारी है तो उसको पालो, अपने घर पर लाकर उसकी सेवा करो| गंगा को बर्बाद किसने किया है तुमने और मैने तो किया है, तो पहले उसे बर्बाद करना तो बंद करो तभी तो बचाओगे |इतने मे ही तो फट जाती है| सब के सब पाखंडी है|


सत्येंद्र पटेल

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