Sunday, 4 May 2014

देश मे कितनी लूट मची है इसको समझो.......



हमारे संसाधानो की लूट कितनी मची है इसको आप समझते हो कि नही? सोचो कैसे ये हमारे राजनेता और कॉर्पोरेट हाउस मिलकर हमारे ही संसाधानो पर राजा बनकर बैठे हुए है|
१- हमारे देश की प्रति ब्यक्ति आय 15000 रुपये है|लेकिन हमारे देश की 80 से 85 प्रतिशत जनता इसके नीचे जीवन यापन करती है| इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि देश के कुछ घरानो के पास ही सारे अधिकार सुरक्षित है| सोचिए की केंद्र सरकार कहती है कि जो ३२ रुपये कमाता है वो ग़रीब नही है और गुजरात सरकार का कहना है की १२ रुपये कमाने वाला ग़रीब नही है| कितने शर्म की बात है कि हमारे देश मे ऐसे ग़रीब लोग भी है| लेकिन हमारे देश मे तो तथाकथित अमीर वही है न जो ३२ रुपये से उपर कमाता है| तो सोचिए देश का क्या हाल हो रहा है?
२- 32*30=960, मतलब जो ग़रीबी के सीमा पर खड़ा है, जो कभी भी अमीर हो सकता है(33 रुपये से ज़्यादा कमाकर) उसके और प्रति व्यक्ति आय मे कितना अंतर है................ 15000 - 960 = 14040 बाप रे बाप....
३- आपको कोयला,गैस और अन्य प्राकृतिक संपदा अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव (मुद्रा की दर को भी ध्यान मे रखे) से मिलता है क्यो? इन सब चीज़ो के मालिक तो हम है| लेकिन नही ये सत्ता के दलालो ने अपनी जमीर बेच दी है| लेकिन उससे बड़ी बात है कि हम नपुंसक हो गये है,नही तो इनकी इतनी मज़ाल कि वो हमारा घर लूट ले जाए| ये इतने अमीर कैसे हो जाते है? ये हमारा समान निकालकर हम तक पहुचाते है बस उसी का हमसे अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य लेते है| सोचो ये तो सरासर लूट है| ये तो वही बात हो गयी कि मैने अपना खेत किसी किसान को जोतने के लिए दिया, उसने मेरे ही खेत मे फसल उगाया और बाद मे कहता है कि अब तुम्हे भी बाजार मूल्य पर खरीदना पड़ेगा|
४- पिछली बार केवल 27 से 29 करोड़ लोगो ने ही अपने मत का प्रयोग किया था जबकि हमारे देश मे 70 करोड़ मतदाता है| अब आप कहते हो कि संसद मे मार- काट चल रहा है और सारे राजनेता चोर है| इस देश का कुछ नही हो सकता | mai भी मानता हूँ कि बिल्कुल नही हो सकता क्योकि आप कमजोर है| प्लीज़ अपने मत का प्रयोग ज़रूर करे|

सत्येंद्र पटेल

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